चलना जबसे हमने सीखा
चप्पलें थी पैरो में
जब भी हमने जूता पहना उन चप्पलो को
कुड़कर देखा
क्या भली नहीं थी हमारी संस्कृति
उन जूतों की नोक से
जिसने सबको कुचलकर खुद जीना सीखा
हमने भी सोच लिया खूब चप्पलो को जोड़
लिया खूब
पहनते हम आज भी जूता है
मानते खुद को भी ऊंचा है
चप्पलें थी पैरो में
जब भी हमने जूता पहना उन चप्पलो को
कुड़कर देखा
क्या भली नहीं थी हमारी संस्कृति
उन जूतों की नोक से
जिसने सबको कुचलकर खुद जीना सीखा
हमने भी सोच लिया खूब चप्पलो को जोड़
लिया खूब
पहनते हम आज भी जूता है
मानते खुद को भी ऊंचा है